यदि यत्नो भवेन्मर्त्य: स सर्वं फलमाप्नुयात्।
नालभ्यं चोपलभ्येत नृणां भरतसत्तम॥ ४॥
अनुवाद
हे भारत भूषण! यदि प्रयत्न करने पर सफलता अवश्यंभावी होती, तो मनुष्य को सभी फल प्राप्त हो जाते; किन्तु जो प्रारब्धवश मनुष्य के लिए अप्राप्य है, वह प्रयत्न करने पर भी प्राप्त नहीं हो सकता।
O Bharat Bhushan! If success was inevitable if one tried, then man would have attained all the fruits; but that which is unattainable for man due to destiny, cannot be obtained even if one tries.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)