श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 184: युधिष्ठिरका विद्या, बल और बुद्धिकी अपेक्षा भाग्यकी प्रधानता बताना और भीष्मजीद्वारा उसका उत्तर  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.184.4 
यदि यत्नो भवेन्मर्त्य: स सर्वं फलमाप्नुयात्।
नालभ्यं चोपलभ्येत नृणां भरतसत्तम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे भारत भूषण! यदि प्रयत्न करने पर सफलता अवश्यंभावी होती, तो मनुष्य को सभी फल प्राप्त हो जाते; किन्तु जो प्रारब्धवश मनुष्य के लिए अप्राप्य है, वह प्रयत्न करने पर भी प्राप्त नहीं हो सकता।
 
O Bharat Bhushan! If success was inevitable if one tried, then man would have attained all the fruits; but that which is unattainable for man due to destiny, cannot be obtained even if one tries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)