श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 184: युधिष्ठिरका विद्या, बल और बुद्धिकी अपेक्षा भाग्यकी प्रधानता बताना और भीष्मजीद्वारा उसका उत्तर  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.184.12 
दानेन भोगी भवति मेधावी वृद्धसेवया।
अहिंसया च दीर्घायुरिति प्राहुर्मनीषिण:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि दान देने से मनुष्य को उपभोग की वस्तुएं प्राप्त होती हैं। वृद्धों की सेवा करने से उसे सद्बुद्धि प्राप्त होती है और अहिंसा धर्म का पालन करने से वह दीर्घायु होता है।॥12॥
 
Wise men say that by giving charity, a man obtains material things for consumption. By serving the elders, he obtains good wisdom and by following the religion of non-violence, he lives a long life.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)