अहंकार त्यागकर देवताओं की पूजा करो। छल-कपट त्यागकर अपने बुजुर्गों की सेवा करो और परलोक की यात्रा के लिए दान का कोष इकट्ठा करो, अर्थात् आध्यात्मिक लाभ के लिए उदारतापूर्वक दान करो।
Abandoning conceit, worship the gods. Giving up deceit and fraud, serve your elders and collect the treasure of charity for the journey to the other world; i.e., donate generously for spiritual gain. 62.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि धर्मप्रमाणकथने द्विषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें धर्मके प्रमाणका वर्णनविषयक एक सौ बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६२ १/२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥