Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.183.6-8h: परन्तु वे बालक हैं। अहंकार के कारण अपने को विद्वान् समझते हैं। अतः उनका उपर्युक्त निष्कर्ष अप्रासंगिक है। (यदि आकाश में नीलापन भी दिखाई दे, तो वह मिथ्या है, अतः केवल प्रत्यक्ष के आधार पर सत्य का निर्णय नहीं हो सकता। धर्म, ईश्वर और परलोक के विषय में शास्त्र प्रमाण ही श्रेष्ठ है; क्योंकि अन्य प्रमाण वहाँ तक नहीं पहुँच सकते।) यदि आप कहें कि एकमात्र ब्रह्म जगत् का कारण कैसे हो सकता है, तो इसका उत्तर यही है कि मनुष्य को आलस्य त्यागकर दीर्घकाल तक योगाभ्यास करना चाहिए और सत्य के साक्षात्कार के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। उसे अनेक प्रकार से अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। इस प्रकार निरन्तर प्रयत्नशील रहने वाला मनुष्य ही इस सत्य का दर्शन कर सकता है, अन्य कोई नहीं। 6-7 1/2। | mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु वे बालक हैं। अहंकार के कारण अपने को विद्वान् समझते हैं। अतः उनका उपर्युक्त निष्कर्ष अप्रासंगिक है। (यदि आकाश में नीलापन भी दिखाई दे, तो वह मिथ्या है, अतः केवल प्रत्यक्ष के आधार पर सत्य का निर्णय नहीं हो सकता। धर्म, ईश्वर और परलोक के विषय में शास्त्र प्रमाण ही श्रेष्ठ है; क्योंकि अन्य प्रमाण वहाँ तक नहीं पहुँच सकते।) यदि आप कहें कि एकमात्र ब्रह्म जगत् का कारण कैसे हो सकता है, तो इसका उत्तर यही है कि मनुष्य को आलस्य त्यागकर दीर्घकाल तक योगाभ्यास करना चाहिए और सत्य के साक्षात्कार के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहना चाहिए। उसे अनेक प्रकार से अपना जीवन व्यतीत करना चाहिए। इस प्रकार निरन्तर प्रयत्नशील रहने वाला मनुष्य ही इस सत्य का दर्शन कर सकता है, अन्य कोई नहीं। 6-7 1/2।
But they are children. Due to arrogance they consider themselves learned. Therefore, the above-mentioned conclusion they make is irrelevant. (Even if the blueness in the sky is visible, it is false, hence the truth cannot be decided on the basis of direct perception alone. In matters of religion, God and the afterlife, the evidence of scriptures is the best; because other evidences cannot reach there.) If you say that how can the only Brahma be the cause of the world, then the answer to this is that man should leave laziness and practice yoga for a long time and remain constantly striving to realize the truth. He should live his life in many ways. Only a man who is always striving in this way can see this truth, no one else. 6-7 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥