श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  13.183.54 
ज्ञानपूर्वकृतं कर्म च्छादयन्ते ह्यसाधव:।
ज्ञानपूर्वं विनश्यन्ति गूहमाना महाजने॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
दुष्ट पुरुष अपने जान-बूझकर किए गए पापों को भी दूसरों से छिपाने का प्रयत्न करते हैं; किन्तु महापुरुषों के सामने अपने पापों को गुप्त रखने से वे नष्ट हो जाते हैं ॥ 54॥
 
Evil men try to hide even their deliberate sins from others; but by keeping their sins secret in front of great men, they get destroyed. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)