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श्री महाभारत
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श्लोक 53
श्लोक
13.183.53
अवराणां समानानां शिष्याणां च समाचरेत्।
पापमाचक्षते नित्यं हृदयं पापकर्मिण:॥ ५३॥
अनुवाद
अपने समान, अपने से छोटे अथवा अपने शिष्य को 'तुम' कहकर संबोधित करने में कोई हानि नहीं है। पापी का हृदय उसके पापों को प्रकट कर देता है ॥ 53॥
There is no harm in addressing someone who is your equal, younger than you or your disciple as 'you'. The heart of a sinner reveals his sins. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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