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mahabharat 13.183.47: सब तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ गुरु है, पवित्र वस्तुओं में हृदय परम पवित्र है। दर्शनों में परम सत्य का ज्ञान श्रेष्ठ है और संतोष ही सर्वोत्तम सुख है॥ 47॥   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.183.47 
तीर्थानां गुरवस्तीर्थं चोक्षाणां हृदयं शुचि।
दर्शनानां परं ज्ञानं संतोष: परमं सुखम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
सब तीर्थों में श्रेष्ठ तीर्थ गुरु है, पवित्र वस्तुओं में हृदय परम पवित्र है। दर्शनों में परम सत्य का ज्ञान श्रेष्ठ है और संतोष ही सर्वोत्तम सुख है॥ 47॥
 
The best pilgrimage among all pilgrimages is the Guru, the heart is the most sacred among holy things. The knowledge of the ultimate truth is the best among philosophies (knowledge) and contentment is the best happiness.॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)