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mahabharat 13.183.37-38: जो अग्नि, बैल, देवता, गौशाला, चौराहा, ब्राह्मण, धार्मिक और वृद्धों को चलते समय दाहिनी ओर रखते हैं, जो वृद्धों, बोझ से पीड़ित लोगों, स्त्रियों, भूमिपति, ब्राह्मण, गौ और राजा को सामने से आते देखकर रास्ता देते हैं, वे सभी पुण्यात्मा पुरुष हैं ॥37-38॥   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  13.183.37-38 
चित्रभानुमनड्वाहं देवं गोष्ठं चतुष्पथम्।
ब्राह्मणं धार्मिकं वृद्धं ये कुर्वन्ति प्रदक्षिणम्॥ ३७॥
वृद्धानां भारतप्तानां स्त्रीणां चक्रधरस्य च।
ब्राह्मणानां गवां राज्ञां पन्थानं ददते च ये॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो अग्नि, बैल, देवता, गौशाला, चौराहा, ब्राह्मण, धार्मिक और वृद्धों को चलते समय दाहिनी ओर रखते हैं, जो वृद्धों, बोझ से पीड़ित लोगों, स्त्रियों, भूमिपति, ब्राह्मण, गौ और राजा को सामने से आते देखकर रास्ता देते हैं, वे सभी पुण्यात्मा पुरुष हैं ॥37-38॥
 
Those who keep fire, bull, deity, cowshed, crossroads, Brahmin, religious and old people on the right side while walking, those who give way to old people, people suffering from burden, women, land owner, Brahmin, cow and king when they see them coming from the front, they are all virtuous persons. ॥37-38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)