श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.183.35 
राजमार्गे गवां मध्ये धान्यमध्ये च धर्मिण:।
नोपसेवन्ति राजेन्द्र सर्गं मूत्रपुरीषयो:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्मा पुरुष मार्ग में, गायों के बीच या खेतों में उगने वाले अन्न के बीच मल-मूत्र त्याग नहीं करता ॥35॥
 
A virtuous man does not excrete urine or feces on the road, among cows or among the grains growing in the fields. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)