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mahabharat 13.183.32: बुद्धिमान पुरुष धर्म को ब्रह्मा का ज्येष्ठ पुत्र कहते हैं। जैसे भोजन करने वाले का मन पके फलों को अधिक पसंद करता है, वैसे ही धार्मिक पुरुष धर्म की ही आराधना करते हैं॥ 32॥   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.183.32 
प्रथमं ब्रह्मण: पुत्रं धर्ममाहुर्मनीषिण:।
धर्मिण: पर्युपासन्ते फलं पक्वमिवाशय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष धर्म को ब्रह्मा का ज्येष्ठ पुत्र कहते हैं। जैसे भोजन करने वाले का मन पके फलों को अधिक पसंद करता है, वैसे ही धार्मिक पुरुष धर्म की ही आराधना करते हैं॥ 32॥
 
Wise men call Dharma the eldest son of Brahma. Just as the foodie's mind likes ripe fruits more, in the same way religious men worship Dharma only.॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)