श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.183.3 
भीष्म उवाच
नास्त्यत्र संशय: कश्चिदिति मे वर्तते मति:।
शृणु वक्ष्यामि ते प्राज्ञ सम्यक् त्वं मेऽनुपृच्छसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "बुद्धिमान राजन! आपने ठीक प्रश्न पूछा है। मैं इसका उत्तर दूंगा, सुनिए। मैं समझता हूं कि इस विषय में कोई संदेह नहीं है।"
 
Bhishma said, "Wise king! You have asked the right question. I will answer it, listen. I think there is no doubt in this matter."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)