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mahabharat 13.183.29: महाराज! जो मनुष्य सत्य और सरलता में लीन रहते हैं तथा सदैव धर्म का पालन करते हैं, वे स्वर्ग का सुख भोगते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.183.29 
ये तुु धर्मं महाराज सततं पर्युपासते।
सत्यार्जवपरा: सन्तस्ते वै स्वर्गभुजो नरा:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जो मनुष्य सत्य और सरलता में लीन रहते हैं तथा सदैव धर्म का पालन करते हैं, वे स्वर्ग का सुख भोगते हैं।
 
Maharaj! Those people who are devoted to truth and simplicity and follow the religion always, enjoy the happiness of heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)