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mahabharat 13.183.28: भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य रजोगुण और तमोगुण से दूषित मन के कारण धर्म का उल्लंघन करते हैं, वे नरक में जाते हैं।"   |   mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.183.28 
भीष्म उवाच
रजसा तमसा चैव समवस्तीर्णचेतस:।
नरकं प्रतिपद्यन्ते धर्मविद्वेषिणो जना:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म ने कहा, "युधिष्ठिर! जो मनुष्य रजोगुण और तमोगुण से दूषित मन के कारण धर्म का उल्लंघन करते हैं, वे नरक में जाते हैं।"
 
Bhishma said, "Yudhishthira! Those men who transgress Dharma due to their mind being polluted by Rajoguna and Tamoguna go to hell."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)