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श्लोक  13.183.27 
युधिष्ठिर उवाच
ये च धर्ममसूयन्ते ये चैनं पर्युपासते।
ब्रवीतु मे भवानेतत् क्व ते गच्छन्ति तादृशा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "पितामह! धर्म की निंदा करने वाले और धर्म का पालन करने वाले लोग किन लोकों में जाते हैं? कृपया इस विषय का वर्णन कीजिए।"
 
Yudhishthira asked, "Grandfather! To which worlds do those people go who criticise Dharma and those who follow Dharma? Please describe this topic."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)