श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.183.25 
प्रमाणमप्रमाणं वै य: कुर्यादबुधो जन:।
न स प्रमाणतामर्हो विवादजननो हि स:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख प्रमाण को अप्रमाण बना देता है, उसे प्रामाणिक नहीं मानना ​​चाहिए, क्योंकि वह केवल विवाद करनेवाला है ॥25॥
 
The fool who makes the evidence unevidence should not be considered authentic because he is only a debater. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)