श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.183.24 
ब्राह्मणेषु च वृत्तिर्या पितृपैतामहोचिता।
तामन्वेहि महाबाहो धर्मस्यैते हि देशिका:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! तुम्हारे पिता और दादाजी ने ब्राह्मणों के साथ जो व्यवहार किया था, वैसा ही तुम्हें भी करना चाहिए, क्योंकि ब्राह्मण ही धर्म के उपदेशक हैं॥24॥
 
Mahabaho! You should follow the way your father and grandfather behaved with the brahmins because the brahmins are the preachers of religion.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)