श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.183.23 
अहिंसा सत्यमक्रोधो दानमेतच्चतुष्टयम्।
अजातशत्रो सेवस्व धर्म एष सनातन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अजातशत्रु! अहिंसा, सत्य, अक्रोध और दान - इन चारों का सदैव पालन करो। यही सनातन धर्म है।
 
Ajatashatro! Non-violence, truth, non-anger and charity – always practice these four. This is the eternal religion. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)