श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.183.21 
उक्तो मार्गस्त्रयाणां च तत्तथैव समाचर।
जिज्ञासा न तु कर्तव्या धर्मस्य परितर्कणात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उपर्युक्त तीन प्रमाणों द्वारा बताए गए धर्म के मार्ग पर चलते रहो। तर्क का सहारा लेकर धर्म की जिज्ञासा करना कभी उचित नहीं है ॥21॥
 
Keep walking on the path of righteousness shown by the above three proofs. It is never appropriate to inquire about righteousness by resorting to logic. ॥21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)