श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.183.18 
वेद: प्रत्यक्षमाचार: प्रमाणं तत्त्रयं यदि।
पृथक्त्वं लभ्यते चैषां धर्मश्चैकस्त्रयं कथम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि प्रत्यक्षज्ञान, आगम और विनय - ये तीन प्रमाण हैं, तो इनकी प्राप्ति पृथक्-पृथक् हो रही है और धर्म एक ही है; फिर ये तीनों धर्म कैसे हो सकते हैं?॥18॥
 
If direct perception, Agama and courtesy - these three are the evidences, then they are being achieved separately and Dharma is one; then how can these three be Dharma?॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)