Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.183.18: यदि प्रत्यक्षज्ञान, आगम और विनय - ये तीन प्रमाण हैं, तो इनकी प्राप्ति पृथक्-पृथक् हो रही है और धर्म एक ही है; फिर ये तीनों धर्म कैसे हो सकते हैं?॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि प्रत्यक्षज्ञान, आगम और विनय - ये तीन प्रमाण हैं, तो इनकी प्राप्ति पृथक्-पृथक् हो रही है और धर्म एक ही है; फिर ये तीनों धर्म कैसे हो सकते हैं?॥18॥
If direct perception, Agama and courtesy - these three are the evidences, then they are being achieved separately and Dharma is one; then how can these three be Dharma?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥