Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.183.12: तब, जैसे कुएँ को तृण से ढक दिया जाता है, वैसे ही धर्म का वेश धारण करके अधर्म ही बाहर आ जाता है। युधिष्ठिर! ऐसी स्थिति में वे दुष्ट लोग शिष्टाचार की मर्यादा तोड़ देते हैं। तुम्हें इस विषय को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। 12। | mahabharat अध्याय 13.183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब, जैसे कुएँ को तृण से ढक दिया जाता है, वैसे ही धर्म का वेश धारण करके अधर्म ही बाहर आ जाता है। युधिष्ठिर! ऐसी स्थिति में वे दुष्ट लोग शिष्टाचार की मर्यादा तोड़ देते हैं। तुम्हें इस विषय को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। 12।
Then, like a well covered with straw, adharma itself comes out in the garb of dharma. Yudhishthira! In that condition, those wicked people break the limits of etiquette. You should listen to this topic carefully. 12.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥