श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 183: धर्मके विषयमें आगम-प्रमाणकी श्रेष्ठता, धर्माधर्मके फल, साधु-असाधुके लक्षण तथा शिष्टाचारका निरूपण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.183.11 
भीष्म उवाच
धर्मस्य ह्रियमाणस्य बलवद्भिर्दुरात्मभि:।
संस्था यत्नैरपि कृता कालेन प्रतिभिद्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "पुत्र! जब शक्तिशाली मनुष्य दुष्ट हो जाते हैं और धर्म की हानि करने लगते हैं, तब सामान्य मनुष्यों द्वारा बड़ी सावधानी से की गई व्यवस्था भी कुछ समय बाद टूट जाती है।"
 
Bhishma said, "Son! When powerful men become wicked and start harming Dharma, then even the arrangements made by ordinary men with great care get broken after some time."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)