श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.182.3 
द्वे तनू तस्य देवस्य वेदज्ञा ब्राह्मणा विदु:।
घोरामन्यां शिवामन्यां ते तनू बहुधा पुन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वेदों में उनके दो रूप बताए गए हैं, जो वेदों को जानने वाले ब्राह्मणों को ज्ञात हैं। उनका एक रूप भयंकर है और दूसरा शिव है। इन दोनों के भी अनेक रूप हैं॥3॥
 
In the Vedas, two forms of Him have been described, which are known to the Brahmins who know the Vedas. One of His forms is fierce and the other is Shiva. There are many variations of these two too.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)