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mahabharat 13.182.23: वेद के शतरुद्रिय अध्याय में उनके सैकड़ों महान नाम हैं, जिन्हें वेदों को जानने वाले ब्राह्मण जानते हैं। महर्षि व्यास ने भी उन महान शिव की स्तुति का वर्णन किया है॥23॥   |   mahabharat अध्याय 13.182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.182.23 
वेदे चास्य विदुर्विप्रा: शतरुद्रीयमुत्तमम्।
व्यासेनोक्तं च यच्चापि उपस्थानं महात्मन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वेद के शतरुद्रिय अध्याय में उनके सैकड़ों महान नाम हैं, जिन्हें वेदों को जानने वाले ब्राह्मण जानते हैं। महर्षि व्यास ने भी उन महान शिव की स्तुति का वर्णन किया है॥23॥
 
In the Shatarudriya chapter of the Veda, there are hundreds of His great names, which are known by the Brahmins who know the Vedas. Maharishi Vyas has also described the praise of that great Shiva.॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)