श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.182.21 
तस्य घोराणि रूपाणि दीप्तानि च बहूनि च।
लोके यान्यस्य पूज्यन्ते विप्रास्तानि विदुर्बुधा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उनके अनेक भयंकर और तेजस्वी रूप हैं, जो संसार में पूजे जाते हैं। उन सब रूपों को विद्वान ब्राह्मण ही जानते हैं ॥21॥
 
He has many fearsome and radiant forms which are worshipped in the world. Only learned Brahmins know all those forms. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)