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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 182: भगवान् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन
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श्लोक 20
श्लोक
13.182.20
विषयस्थ: शरीरेषु स मृत्यु: प्राणिनामिह।
स च वायु: शरीरेषु प्राणापानशरीरिणाम्॥ २०॥
अनुवाद
वे जीवों के शरीरों में निवास करते हैं और उनकी मृत्युस्वरूप हैं तथा वे शरीर के भीतर वायु, श्वास आदि के रूप में निवास करते हैं ॥20॥
He resides in the bodies of living beings and is their form of death and He resides within the body in the form of air, breath etc. 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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