vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 182: भगवान् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन
»
श्लोक 2
श्लोक
13.182.2
वदन्त्यग्निं महादेवं तथा स्थाणुं महेश्वरम्।
एकाक्षं त्र्यम्बकं चैव विश्वरूपं शिवं तथा॥ २॥
अनुवाद
विद्वान् पुरुष इन महादेवजी को अग्नि, स्थाणु, महेश्वर, एकाक्ष, त्रयम्बक, विश्वरूप तथा शिव आदि अनेक नामों से पुकारते हैं॥2॥
Learned men call this Mahadevji by many names like Agni, Sthanu, Maheshwar, Ekaksh, Trimbak, Vishwaroop and Shiva etc. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×