श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.182.2 
वदन्त्यग्निं महादेवं तथा स्थाणुं महेश्वरम्।
एकाक्षं त्र्यम्बकं चैव विश्वरूपं शिवं तथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
विद्वान् पुरुष इन महादेवजी को अग्नि, स्थाणु, महेश्वर, एकाक्ष, त्रयम्बक, विश्वरूप तथा शिव आदि अनेक नामों से पुकारते हैं॥2॥
 
Learned men call this Mahadevji by many names like Agni, Sthanu, Maheshwar, Ekaksh, Trimbak, Vishwaroop and Shiva etc. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)