श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 182: भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.182.1 
वासुदेव उवाच
युधिष्ठिर महाबाहो महाभाग्यं महात्मन:।
रुद्राय बहुरूपाय बहुनाम्ने निबोध मे॥ १॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - महाबाहो युधिष्ठिर! अब मैं अनेक नाम और रूप धारण करने वाले महापुरुष भगवान रुद्र का माहात्म्य कहता हूँ, सुनो॥1॥
 
Lord Shri Krishna said – Mighty-armed Yudhishthir! Now I am telling the greatness of Lord Rudra, the great man who assumes many names and forms, listen. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)