श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.181.6 
नास्ति किंचित् परं भूतं महादेवाद् विशाम्पते।
इह त्रिष्वपि लोकेषु भूतानां प्रभवो हि स:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तीनों लोकों में महादेवजी से बढ़कर कोई दूसरा देवता नहीं है; क्योंकि वे ही समस्त प्राणियों की उत्पत्ति के कारण हैं॥6॥
 
Prajanath! There is no other deity greater than Mahadevji in the three worlds; because he is the cause of the origin of all beings. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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