श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.181.44 
ईदृश: स महादेवो भूयश्च भगवानत:।
न हि शक्या गुणा वक्तुमपि वर्षशतैरपि॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
भगवान महादेव इतने शक्तिशाली हैं, बल्कि वे इससे भी अधिक शक्तिशाली हैं। उनके गुणों का वर्णन सैकड़ों वर्षों में भी नहीं किया जा सकता॥ 44॥
 
Lord Mahadeva is so powerful, in fact he is even more powerful than this. His qualities cannot be described even in hundreds of years.॥ 44॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ईश्वरप्रशंसा नाम षष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १६०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ईश्वरकी प्रशंसा नामक एक सौ साठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६०॥

 
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas