Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.181.38: मेरे महल में उन्होंने मेरे विरुद्ध अनेक अपराध किए। वे सभी अत्यंत दुःखी थे, फिर भी मैंने उन्हें उदारतापूर्वक क्षमा कर दिया। 38.   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.181.38 
विप्रकारान् प्रयुङ्‍‍क्ते स्म सुबहून् मम वेश्मनि।
तानुदारतया चाहं चक्षमे चातिदु:सहान्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मेरे महल में उन्होंने मेरे विरुद्ध अनेक अपराध किए। वे सभी अत्यंत दुःखी थे, फिर भी मैंने उन्हें उदारतापूर्वक क्षमा कर दिया। 38.
 
They committed many crimes against me in my palace. They were all extremely miserable, yet I forgave them generously. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)