श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.181.37 
स चापि ब्राह्मणो भूत्वा दुर्वासा नाम वीर्यवान्।
द्वारवत्यां मम गृहे चिरं कालमुपावसत्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वही महाबली महादेव दुर्वासा नामक ब्राह्मण का रूप धारण करके द्वारकापुरी में मेरे घर में बहुत समय तक रहे॥37॥
 
The same mighty Mahadeva took the form of a Brahmin named Durvasa and stayed in my house in Dwarkapuri for a long time. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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