श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.181.34 
न सम्बुबुधिरे चैव देवास्तं भुवनेश्वरम्।
सप्रजापतय: सर्वे तस्मिन् मुमुहुरीश्वरे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सब देवता और प्रजापति उन भुवनेश्वर महादेवजी को पहचान न सके। सब लोग उन भगवान पर मोहित हो गए॥34॥
 
All the gods and Prajapatis could not recognize that Bhuvaneshwar Mahadevji. Everybody was fascinated about that God. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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