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mahabharat 13.181.27-28h: तत्पश्चात् वहाँ उपस्थित समस्त श्रेष्ठ देवताओं ने रुद्रदेव से कहा - 'हे भगवान् रुद्र! पशुरूपी राक्षस हमारे समस्त कर्मों के कारण भयंकर हो गए हैं और आगे भी हमें भय देते रहेंगे। हे माननीय! हमारी प्रार्थना है कि आप तीनों पुरों सहित समस्त राक्षसों का नाश करके लोकों की रक्षा करें।' 27 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  13.181.27-28h 
तत ऊचुर्महात्मानो देवा: सर्वे समागता:।
रुद्र रौद्रा भविष्यन्ति पशव: सर्वकर्मसु॥ २७॥
जहि दैत्यान् सह पुरैर्लोकांस्त्रायस्व मानद।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वहाँ उपस्थित समस्त श्रेष्ठ देवताओं ने रुद्रदेव से कहा - 'हे भगवान् रुद्र! पशुरूपी राक्षस हमारे समस्त कर्मों के कारण भयंकर हो गए हैं और आगे भी हमें भय देते रहेंगे। हे माननीय! हमारी प्रार्थना है कि आप तीनों पुरों सहित समस्त राक्षसों का नाश करके लोकों की रक्षा करें।' 27 1/2॥
 
Thereafter, all the great gods present there said to Rudradev - 'Lord Rudra! The animal-like demons have become terrible for all our deeds and will continue to give us fear in the future also. So honorary! Our prayer is that you destroy all the demons along with the three Puras and protect the worlds. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)