श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  13.181.25 
असुराणां पुराण्यासंस्त्रीणि वीर्यवतां दिवि।
आयसं राजतं चैव सौवर्णमपि चापरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में बलवान दैत्यों के तीन नगर (विमान) आकाश में विचरण करते थे, उनमें से एक लोहे का, दूसरा चाँदी का और तीसरा सोने का बना था॥ 25॥
 
In the past, the powerful demons had three cities (planes) which used to roam in the sky. One of them was made of iron, the second of silver and the third of gold.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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