श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.181.20 
तत: प्रणेमुर्देवास्ते वेपमाना: स्म शङ्करम्।
पुनश्च संदधे रुद्रो दीप्तं सुनिशितं शरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब सभी देवता कांप उठे और भगवान शिव को प्रणाम करने लगे। इधर रुद्रदेव ने पुनः एक प्रज्वलित एवं तीक्ष्ण बाण चलाया।
 
Then all the gods trembled and started bowing down to Lord Shiva. Here Rudradev again aimed a blazing and sharp arrow.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas