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श्लोक 13.181.20  |
तत: प्रणेमुर्देवास्ते वेपमाना: स्म शङ्करम्।
पुनश्च संदधे रुद्रो दीप्तं सुनिशितं शरम्॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| तब सभी देवता कांप उठे और भगवान शिव को प्रणाम करने लगे। इधर रुद्रदेव ने पुनः एक प्रज्वलित एवं तीक्ष्ण बाण चलाया। |
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| Then all the gods trembled and started bowing down to Lord Shiva. Here Rudradev again aimed a blazing and sharp arrow. |
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