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mahabharat 13.181.14: पार्थ! उनके धनुष की टंकार से समस्त लोक व्याकुल और असहाय हो गए तथा देवता और दानव सभी शोक में डूब गए॥14॥   |   mahabharat अध्याय 13.181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.181.14 
तेन ज्यातलघोषेण सर्वे लोका: समाकुला:।
बभूवुरवशा: पार्थ विषेदुश्च सुरासुरा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! उनके धनुष की टंकार से समस्त लोक व्याकुल और असहाय हो गए तथा देवता और दानव सभी शोक में डूब गए॥14॥
 
Parth! At the sound of his bow's string, all the people became distraught and helpless and all the gods and demons became engrossed in sadness. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)