श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 181: श्रीकृष्णद्वारा भगवान‍् शङ्करके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.181.1 
युधिष्ठिर उवाच
दुर्वासस: प्रसादात् ते यत् तदा मधुसूदन।
अवाप्तमिह विज्ञानं तन्मे व्याख्यातुमर्हसि॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - मधुसूदन! उस समय दुर्वासा की कृपा से आपको इस लोक में जो ज्ञान प्राप्त हुआ, उसके बारे में कृपया मुझे विस्तार से बताइये।
 
Yudhishthira asked - Madhusudan! Please tell me in detail about the knowledge you gained in this world by the grace of Durvasa at that time.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas