Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.180.53-54h: रुक्मिणी नंदन! मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि ये सभी वस्तुएँ नए और स्वास्थ्यवर्धक रूप में उपलब्ध थीं और मैं मन ही मन ब्राह्मणों की पूजा करता था। 53 1/2 | mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽहं विस्मयं प्राप्त: सर्वं दृष्ट्वा नवं दृढम्॥ ५३॥
अपूजयं च मनसा रौक्मिणेय सदा द्विजान्।
अनुवाद
रुक्मिणी नंदन! मुझे यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ कि ये सभी वस्तुएँ नए और स्वास्थ्यवर्धक रूप में उपलब्ध थीं और मैं मन ही मन ब्राह्मणों की पूजा करता था। 53 1/2
Rukmini Nandan! I was very surprised to see that all these things were available in new and healthy form and I always worshipped the Brahmins in my mind. 53 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥