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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 51-52h
 
 
श्लोक  13.180.51-52h 
एतद् व्रतमहं कृत्वा मात्रा ते सह पुत्रक॥ ५१॥
तत: परमहृष्टात्मा प्राविशं गृहमेव च।
 
 
अनुवाद
बेटा! ऐसी प्रतिज्ञा करके मैं तुम्हारी माता के साथ बड़े आनन्द से घर में प्रवेश किया।
 
Son! Having made such a promise I entered the house with your mother with great joy. 51 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)