Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.180.50-51h: कितना प्रभावशाली पुत्र है! यह कहकर वह वहाँ से अंतर्ध्यान हो गया। उसके अंतर्ध्यान होने के बाद मैंने अस्पष्ट स्वर में मन ही मन प्रतिज्ञा की कि आज से कोई भी ब्राह्मण मुझसे जो भी कहेगा, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा। | mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इत्युक्त्वा स तदा पुत्र तत्रैवान्तरधीयत।
तस्मिन्नन्तर्हिते चाहमुपांशुव्रतमाचरम्॥ ५०॥
यत्किंचिद्ब्राह्मणो ब्रूयात् सर्वं कुर्यामिति प्रभो।
अनुवाद
कितना प्रभावशाली पुत्र है! यह कहकर वह वहाँ से अंतर्ध्यान हो गया। उसके अंतर्ध्यान होने के बाद मैंने अस्पष्ट स्वर में मन ही मन प्रतिज्ञा की कि आज से कोई भी ब्राह्मण मुझसे जो भी कहेगा, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा।
What an influential son! Saying this, he disappeared from there. After he disappeared, I quietly took a vow in an unclear voice that from today onwards, whatever a Brahmin will say to me, I will fulfill it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥