Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.180.44-45h: परंतु तुमने यह खीर अपने पैरों के तलवों पर नहीं लगाई। बेटा! तुमने ऐसा क्यों किया? मुझे तुम्हारा यह कार्य अच्छा नहीं लगा।’ जब उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक मुझसे यह कहा, तो मैंने देखा कि मेरे शरीर में एक अद्भुत तेज भर गया। | mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तु पादतले लिप्ते कस्मात्ते पुत्रकाद्य वै।
नैतन्मे प्रियमित्येवं स मां प्रीतोऽब्रवीत् तदा॥ ४४॥
इत्युक्तोऽहं शरीरं स्वं ददर्श श्रीसमायुतम्।
अनुवाद
परंतु तुमने यह खीर अपने पैरों के तलवों पर नहीं लगाई। बेटा! तुमने ऐसा क्यों किया? मुझे तुम्हारा यह कार्य अच्छा नहीं लगा।’ जब उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक मुझसे यह कहा, तो मैंने देखा कि मेरे शरीर में एक अद्भुत तेज भर गया।
But you have not applied this kheer on the soles of your feet. Son! Why did you do this? I did not like this act of yours.' When he said this to me happily, I saw my body filled with a wonderful radiance. 44 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥