Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.180.37-38: तब उस महायशस्वी ब्राह्मण ने मेरी ओर देखकर कहा, 'महाबाहु श्रीकृष्ण! आपने स्वभाव से ही क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है। उत्तम व्रतधारी गोविन्द! मैंने यहाँ आपका कोई अपराध नहीं देखा, अतः मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ। मुझसे अपनी मनोवांछित इच्छा माँगिए।' | mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब उस महायशस्वी ब्राह्मण ने मेरी ओर देखकर कहा, 'महाबाहु श्रीकृष्ण! आपने स्वभाव से ही क्रोध पर विजय प्राप्त कर ली है। उत्तम व्रतधारी गोविन्द! मैंने यहाँ आपका कोई अपराध नहीं देखा, अतः मैं आपसे अत्यंत प्रसन्न हूँ। मुझसे अपनी मनोवांछित इच्छा माँगिए।'
Then the illustrious Brahmin looked at me and said, 'Mahabahu Shri Krishna! You have conquered anger by nature. Uttam Vratdhari Govind! I have not seen any crime of yours here, so I am very pleased with you. Ask me for your desired wishes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥