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mahabharat 13.180.30: उस समय ईर्ष्या के कारण मुझे किंचितमात्र भी दुःख नहीं हुआ। इसी अवस्था में वह महल से बाहर निकला और विशाल राजमार्ग पर चलने लगा।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.180.30 
न च मे स्तोकमप्यासीद् दु:खमीर्ष्याकृतं तदा।
तथा स राजमार्गेण महता निर्ययौ बहि:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उस समय ईर्ष्या के कारण मुझे किंचितमात्र भी दुःख नहीं हुआ। इसी अवस्था में वह महल से बाहर निकला और विशाल राजमार्ग पर चलने लगा।
 
At that time I did not feel even the slightest sorrow due to jealousy. In this state he came out of the palace and started walking on the huge highway.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)