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mahabharat 13.180.28: ऋषि ने तुरन्त ही रानी रुक्मिणी को, जिनका सम्पूर्ण शरीर खीर से सना हुआ था, एक रथ में जोत लिया और उस रथ पर बैठकर वे मेरे घर से चले गये।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.180.28 
मुनि: पायसदिग्धाङ्गीं रथे तूर्णमयोजयत्।
तमारुह्य रथं चैव निर्ययौ स गृहान्मम॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ऋषि ने तुरन्त ही रानी रुक्मिणी को, जिनका सम्पूर्ण शरीर खीर से सना हुआ था, एक रथ में जोत लिया और उस रथ पर बैठकर वे मेरे घर से चले गये।
 
The sage immediately yoked Queen Rukmini, whose entire body was smeared with kheer, to a chariot and, sitting in that chariot, he left my house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)