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mahabharat 13.180.21: एक दिन अपने निवासस्थान पर जाकर उसने वहाँ रखे हुए पलंग, बिछौने और वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित कन्याओं को जलाकर राख कर दिया और स्वयं वहाँ से चला गया॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.180.21 
अथ स्वावसथं गत्वा स शय्यास्तरणानि च।
कन्याश्चालंकृता दग्ध्वा ततो व्यपगत: पुन:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
एक दिन अपने निवासस्थान पर जाकर उसने वहाँ रखे हुए पलंग, बिछौने और वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित कन्याओं को जलाकर राख कर दिया और स्वयं वहाँ से चला गया॥ 21॥
 
One day, going to his place of stay, he burned to ashes the beds, beddings and the girls adorned with clothes and ornaments laid there and then himself moved away from there.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)