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mahabharat 13.180.20: वह अचानक ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगता और अचानक ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता। उस समय इस धरती पर उसकी उम्र का कोई नहीं था।   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.180.20 
अकस्माच्च प्रहसति तथाकस्मात् प्ररोदिति।
न चास्य वयसा तुल्य: पृथिव्यामभवत् तदा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह अचानक ज़ोर-ज़ोर से हंसने लगता और अचानक ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता। उस समय इस धरती पर उसकी उम्र का कोई नहीं था।
 
He would suddenly start laughing loudly and suddenly start crying profusely. At that time there was no one of his age on this earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)