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श्लोक 13.180.15  |
दीर्घेभ्यश्च मनुष्येभ्य: प्रमाणादधिको भुवि।
स स्वैरं चरते लोकान् ये दिव्या ये च मानुषा:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| वह पृथ्वी के महानतम पुरुषों से भी ऊँचा था और अपनी इच्छानुसार दिव्य तथा मानवीय लोकों में स्वतन्त्रतापूर्वक विचरण कर सकता था ॥15॥ |
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| He was taller than the greatest men on earth and could travel freely between the divine and human worlds as per his wish. ॥15॥ |
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