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mahabharat 13.180.11: बेटा! ऐसी स्थिति में मैं ब्राह्मणों का आदर कैसे न करूँ? हे महाबाहो! मुझे परमेश्वर मानकर (सब कुछ करने में समर्थ) ब्राह्मणों पर क्रोध न करो।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.180.11 
तत्कथं वै नाद्रियेयमीश्वरोऽस्मीति पुत्रक।
मा ते मन्युर्महाबाहो भवत्वत्र द्विजान् प्रति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
बेटा! ऐसी स्थिति में मैं ब्राह्मणों का आदर कैसे न करूँ? हे महाबाहो! मुझे परमेश्वर मानकर (सब कुछ करने में समर्थ) ब्राह्मणों पर क्रोध न करो।॥11॥
 
Son! In such a situation how can I not respect the brahmins? O mighty-armed one! You should not get angry with the brahmins by believing that I am the Supreme Being (capable of doing everything). ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)