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mahabharat 13.180.10: धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि के लिए, मोक्ष की प्राप्ति के लिए, यश, लक्ष्मी और आरोग्य की प्राप्ति के लिए तथा देवताओं और पितरों के पूजन के समय हमें ब्राह्मणों को पूर्णतः संतुष्ट करना चाहिए।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 13.180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 180: श्रीकृष्णका प्रद्युम्नको ब्राह्मणोंकी महिमा बताते हुए दुर्वासाके चरित्रका वर्णन करना और यह सारा प्रसंग युधिष्ठिरको सुनाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.180.10 
त्रिवर्गे चापवर्गे च यश: श्रीरोगशान्तिषु।
देवतापितृपूजासु संतोष्याश्चैव नो द्विजा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धर्म, अर्थ और काम की सिद्धि के लिए, मोक्ष की प्राप्ति के लिए, यश, लक्ष्मी और आरोग्य की प्राप्ति के लिए तथा देवताओं और पितरों के पूजन के समय हमें ब्राह्मणों को पूर्णतः संतुष्ट करना चाहिए।॥10॥
 
For the success of Dharma, Artha and Kama, for the attainment of Moksha, for the attainment of Fame, Lakshmi and Health and at the time of worshipping Gods and Ancestors, we must satisfy the Brahmins completely.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)