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mahabharat 13.18.9-10: परन्तु मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन बुद्धिमान महादेव की कृपा से उनके चरित्र और स्तोत्र का संक्षेप में वर्णन करूँगा। उनकी अनुमति के बिना उन महेश्वर की स्तुति नहीं की जा सकती।॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  13.18.9-10 
किं तु देवस्य महत: संक्षिप्तार्थपदाक्षरम्॥ ९॥
शक्तितश्चरितं वक्ष्ये प्रसादात् तस्य धीमत:।
अप्राप्य तु ततोऽनुज्ञां न शक्य: स्तोतुमीश्वर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
परन्तु मैं अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन बुद्धिमान महादेव की कृपा से उनके चरित्र और स्तोत्र का संक्षेप में वर्णन करूँगा। उनकी अनुमति के बिना उन महेश्वर की स्तुति नहीं की जा सकती।॥9-10॥
 
But I shall, according to my ability, describe His character and stotra in brief, with the grace of that wise Mahadeva. Without obtaining His permission, that Maheshwara cannot be praised.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)